मां के कड़कड़ाने से ही उसकी आंख खुली थी। रात को भी मां से पिटकर बिना कुछ खाये—पिये ही सो गया था मन्नू। एक कप चाय और एक रोटी देकर मां ने उसे लाला की दुकान पर काम पर जाने के लिये कहा पर वह नहीं गया तो मां झुंझलाकर उसे फिर से पीटने लगी। वह रोता—चीखता नहीं जाऊंगा... नहीं जाऊंगा... करता हुआ घर से बाहर निकल आया था।
लाला जी की दुकान से दो चार दुकानें इधर ही रुक गया वह और एक बंद दुकान के फट्....
