नीतू मुकुल

यहां दरख्त बोलता है...

मन के उजास भरे कोने में हम सब अपने—अपने दीयों, अपनी—अपनी रोशनियों के खुमार में कई बार असल चांदनी को पीछे छोड़ते रहते हैं और सोचते हैं, प्रकाश उत्सव और आनंद ये सब सुदूर जीवन के अरण्य में छूट गयी दुर्लभ चीजें हैं। दूसरों के आनंद में खुशियों की डुबकियां लगाने वाले शायद सदियों पहले ही उगते थे। इस आधुनिकता की दौड़ में हम खुद के फेवरेट होकर रह गए हैं।जॉन लुबॉक का कहना था कि जमीन, आसमा....

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