हिंदी फिल्मों में एक अजीब तरह की भेड़ों वाली होड़ चलती है। निर्माता, निर्देशक, अभिनेता बस सफलता की गारंटी के फॉर्मूले ढूंढ़ रहे होते हैं। फॉर्मूला मतलब कामयाबी का कोई शार्ट—कट रास्ता! अब जाहिर है, यह रास्ता आसान होता, तो हर दूसरा—तीसरा व्यक्ति फिल्मकार न हो जाता। सही बात तो यह है कि यहां सफलता पाने के लिए न जाने कितने पापड़ बेलने पड़ते हैं! और उसका सबसे बड़ा कारण यह है कि सफलता ....
