हरजेंद्र चौधरी

त्रिशंकु 

समस्याओं—मुश्किलों से बुरी तरह ठुका हुआ था मेरा गंवई बचपन
साइकिल पर आता—जाता था दो कोस दूर के स्कूल
ट्टयूनिफॉर्म’ का एक ही सैट होता था
जो इतवार को ही धुलता था
शुक्र है कि सफाई के निरीक्षण का दिन होता था सोमवार
कॉपियों का काम स्लेट से लेने की कोशिश में
मास्टरों की मार खाता था
तवे की कालिख घोलकर निरक्षर मां तैयार करती थी स्याही
कलम बनाने के लिए सरकंडों का जं....

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