बात थोड़ी पुरानी हैं। लगभग 60—62 साल पहले मैं छठे वर्ग का विघार्थी था, 1956 में। पहली बार उनका नाम जाना और पहली बार ही उनकी कहानी पढ़ी। भाषा शैली आकर्षक एवं बोधगम्य। अनुप्रास की छटा अलग। कुछ वर्षों बाद दुर्लभ संयोग हुआ। मेरे दूसरे (अब हिंदी के प्रतिष्ठित आलोचक) का विवाह बिहार के लोकप्रिय कवि श्री रामगोपाल शर्मा 'रुद्र’ की सबसे बड़ी सुपुत्री रागिनी शर्मा के साथ पटना में हुआ। गां....
