रत्नकुमार सांभरिया की प्रतिनिधि कहानियां पढ़ने के बाद यह बात कही जा सकती है कि सांभरिया लोक—जीवन और मानवीय मूल्यों के कथाकार हैं। कहानियों में विमर्श का कोण आलोचक अन्वेषित कर सकता है मगर सभी कहानियों का अन्तर्कथ्य तथा उस कथ्य द्वारा प्रतिपादित चेतना मानव समाज की बेहतरी के लिए एक वैकल्पिक निर्मिति का प्रस्तावान है। यह निर्मिति नीति की नहीं है, सत्ता और क्रान्ति की निर्मित....
