पुष्पा भारती

सूर्यबाला का स्तरीय लेखन मुझे पसंद है

हिंदी साहित्य में केवल सूर्यबाला एक ऐसी रचनाकार हैं, जो बिना किसी दंद-फंद में फंसे, किसी राजनीति की बगैर हर तिकड़म से दूर रहकर लेखन किया। अपने प्रचार से दूर रहीं और अपने काम में लगी रहीं। यह उनका सबसे बड़ा गुण है। धर्मवीर जी पारखी थे। उन्हें नवोदित रचनाकारों की लेखनी को परखना आता था। उन्होंने सूर्यबाला को परख लिया था। अपने पति के साथ लेकर सूर्यबाला ‘मेरे संधि-पत्र’ उप....

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