सूर्यबाला उस मध्यवर्गीय जीवन की अद्भुत कथाकार हैं जिसे हम कम से कम दो दशक पहले पीछे छोड़ चुके हैं। लेकिन उसे पीछे छोड़ देने का मतलब उसका अप्रासंगिक हो जाना नहीं है। वह एक मूल्यवान स्मृति का हिस्सा है। उसकी अपनी एक गहरी संवेदना है। निश्चय ही इस संवेदना का दायरा घर परिवार और प्रेम के इर्द-गिर्द घूमता है, लेकिन यह दायरा छोटा नहीं है। दूसरी बात यह कि सूर्यबाला के कथा संसार में ....
