हम लोगों को हिंदी की किताबें आसानी से नहीं मिलती थी लेकिन ‘धर्मयुग’ का ऐसा इंतजार रहता था कि हम तीनों बहनें आपस में झगड़ लिया करते थे। कई बार छीना-झपटी में धर्मयुग की प्रति फट जाती थी। मेरी बहन को एक बार इसके लिए बहुत मार भी पड़ी थी। हम तीनों बहनों में प्रतिस्पर्धा रहती थी कि पहले धर्मयुग किसके हाथ जाएगी। यह सब सिर्फ इस वजह से होना था कि सूर्यबाला जी का धारावाहिक उपन्यास &l....
