आरती बंसल

आरती बंसल की दो कविताएं

प्रवाह

सृष्टि की जीवंतता 
हर वक्त गतिशील है
झरनों का कल-कल नाद
सरिता का अविरल वेग 
वायु का स्वच्छंद विचरण 
वनस्पति जगत की चेतनता 
पशु पक्षियों का कलरव
मानव हृदय का स्पंदन 
सभी में सतत एक प्रवाह है
जो ब्रह्मांड में भी व्याप्त है
ग्रह नक्षत्रें का परिसंचरण 
ट्टतुओं का क्रमशः पदार्पण 
मेघों द्वारा पृथ्वी पर 
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