कृष्ण बिहारी

स्कैंड हस्ताक्षर और घपला

इक्कीसवीं सदी के दूसरे दशक में दुनिया पर डिजिटल होने का भूत सवार हुआ। कागज बचाओ के नाम पर जो मुहिम शुरू हुई उससे लगा कि कागज भले न बचे मगर पेड़ जरूर कटने से बचेंगे। लोग पेड़ लगाते नहीं तो कोई बात नहीं लेकिन अब उनके लिए पेड़ कटेंगे भी नहीं। बाद में मुझे लगा कि यह सब सोचना केवल दिल को झूठा मुकाम देना है। कागज की बरबादी को जितना मैंने इस स्कूल में देखा है उससे यह अनुमान ....

Subscribe Now

पाखी वीडियो


दि संडे पोस्ट

पूछताछ करें