मौजूदा समय में रामधारी सिंह दिनकर की ‘राष्ट्रवाद’ संबंधी समझ को दृढ़ता के साथ रेखांकित करने की आत्यंतिक जरूरत है क्योंकि हिंदुत्ववादी शक्तियां उनकी राष्ट्रीय भावों की ओजपूर्ण कविताओं के सहारे अपने अंधराष्ट्रवाद के अभियान को साधना चाहती हैं। ऐसे में, दिनकर को लेकर पाठकों में एक ठोस समझदारी विकसित करने की आवश्यकता है ताकि राहु के ग्रसने से दिनकर को बचाय....
