विजयश्री तनवीर

डाई अलोन

यह सब औचक ही हुआ था। एक सुखद अनहोनी की तरह। मरियल सी बीप के साथ कई दिनों से चुप पड़े उसके फोन पर छोटी-छोटी दो सतरों का एक संदेश चमका था ‘सफर का सारा बंदोबस्त हो गया है तारा
---बस घंटे भर में निकलना होगा।’ और जैसे किसी ने मंत्र पढ़कर फूंक दिया हो, निरे जादुई ढंग से उसकी जर्जर होती जिजीविषा उसके भीतर उचककर बैठ गई थी। वह किसी भी ढंग यहां से निकल जाना चाहती थी। उसे जरा ....

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