मधु गुप्ता

‘मेरे संधि-पत्र’ से गुजरते हुए

सूर्यबाला जी! आपकी रचनाओं से मैं सत्तर के दशक से गुजरती रही हूं। आपकी रचनाओं का भाव बोध मुझे तब से ही आंदोलित करता रहा है...मैं समय समय पर आपको डूब कर पढ़ती रही हूं, बार-बार पढ़ती रही हूं...।
मेरे संधि-पत्र के लिए कुछ भी कहने से पहले आपको एक बात बताना चाहती हूं कि मैंने कॉलेज के लिए दो और अपने लिए एक प्रति खरीदी थी। उपन्यास इतना हृदय ग्राही था कि मैंने अपनी पूरी कुलीग....

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