जावेद आलम खान

जावेद आलम खान की पांच कविताएं

अनचिह्नी पहचान
 

कुछ अक्षर हमेशा अपनी पहचान को तरसते हैं 
जैसे कुछ लोग महरूम रहते हैं अपने अस्तित्व से 
जिनकी नफासत को उच्चारण से पहचानना था 
उनकी पहचान नुक्ते की परिसीमा में बांध दी गई 
जिस शुद्धता को झरने में तलाशना था 
उसकी कसौटी बोतल के बंद पानी में फिल्टर हुई 

जिन रंगों से त्योहार का उल्लास बरसाना ....

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