विनोद शाही

कविता का जीवन, जीवन की कविता

कविता की आत्मा को संस्कृत काव्यशास्त्र ‘जीवित’ कहता है। यानी वह यह खोज करता है कि वह तत्व, जिससे कविता जीवित हो जाती है, क्या है? जाहिर है, यह जीवन जैसी रहस्यमय चीज को परिभाषित करने का मामला है।
सहस्राब्दियों से इस गुत्थी को सुलझाने की कोशिश होती रही है। पर जो जवाब खोजे गए हैं, वे कविता के प्राणवान होने में सहयोगी तत्वों या लक्षणों की शिनाख्त करते हैं। जीव....

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