किसी व्यक्ति विशेष पर बात करना उतना ही कठिन है जितना किसी विचारधारा पर बात करना। भारतीय समाज और राजनीति में आंबेडकर भी एक ऐसे ही व्यक्तित्व है जिनकी गणना न केवल पीएच.डी. करने वाले पहले दलित के रूप में की जाती है अपितु स्वतंत्र भारत की पहली सरकार में कानून मंत्री और संविधान का प्रारूप तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष के रूप में भी की जाती है। शायद उनकी यही जुझार....
