संजय कुंदन

संजय कुंदन की कविताएं

एक अकेला आदमी


दूसरे अकेले आदमी से मिला
और उसने तीसरे अकेले आदमी के बारे में पूछा
जिसके बारे में दूसरे ने कहा कि 
उनसे बहुत दिनों से मुलाकात नहीं हुई

इस पर पहला कहना चाहता था
कि वह तो खुद से भी बहुत दिनों से
नहीं मिल पाया है पर वह चुप रहा
क्योंकि उसे लगा कि यह कहते हुए 
वह कहीं रो न दे
जबकि दूसरे के जी में आया ....

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