अमिता नीरव

आत्महंता की डायरी

सुनहु भरत भावी प्रबल, बिलखि कहेहुं मुनिनाथ। 
हानि, लाभ, जीवन, मरन, जस, अपजस विधि हाथ। 
भीतर के कमरे से एक स्त्री स्वर सुनाई दे रहा था। स्वर कांपता-सा था, मुझे पता है कि यह शेखर की अम्मां की आवाज है। मैं इस घर में कई बार पहले भी आ चुका हूं, मगर यह कभी भी इतना उदास नहीं था, जितना आज लग रहा है। 
सामने की गुलाबी दीवार पर सीलन के निशान थे, दीवार के उस पार किचन है, जिसे ये लोग च....

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