ललन चतुर्वेदी

ललन चतुर्वेदी की चार कविताएं

इकतीस दिसंबर

किसी को जाते हुए देखना
बहुत अलग होता है किसी को आते हुए देखने से
मैं कृतज्ञ भाव से देख रहा हूं तुम्हें जाते हुए
पूरी की पूरी तुम्हारी छवि
आज एकबारगी उतर आई है मेरी आंखों में
तुम पर लगे सारे आरोपों को मैं खारिज करता हूं
तुमने बहुत सुकून के पल भी दिए
उन पलों को एक साथ फिर जी रहा हूं
इतना अभी कृतघ्न नहीं हुआ हूं कि
कल के जश्न में ....

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