कृष्ण कल्पित

रामचरितमानस मनुस्मृति नहीं, एक महाकाव्य है

आलोचक की प्रतीक्षा


कृति आलोचक बनाती है!
कृति आलोचक से नहीं, आलोचक कृति से बनता है। जायसी ने रामचंद्र शुक्ल को हिंदी का आदि आलोचक बना दिया। हजारी प्रसाद द्विवेदी को कबीर ने। निराला ने रामविलास शर्मा को बड़ा आलोचक बना दिया।
मुक्तिबोध रघुवीर सहाय और धूमिल की कृतियों ने नामवर सिंह को अप्रतिम आलोचक बनाया और अंत समय तक नामवर का जलवा बना रहा और ....

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