वर्तमान समय बहुत तेजी से बदल रहा है। वह किसी भी रूप, क्षेत्र में क्यों न हो बदलाव स्पष्टतः दिखाई दे रहा है। लेकिन बदलाव का यह माहौल किंचित चिंतित भी कर रहा है। आज राष्ट्रवाद और धर्म का रंग जितना गहराता जा रहा है। इसके कई साइडइफेक्ट स्पष्टतः नजर आ रहे हैं जिसमें से एक है लोकतंत्र पर, लोकतांत्रिक समाज पर मंडराता हुआ खतरा। यह वैचारिकता जितनी गाढ़ी होती जाएगी उतनी ही तेजी से स....
