इस बस्ती के घरों की ‘लक्ष्मियां’ अपने-अपने द्वारों पर पानी का ‘छड़ा’ (छींटे) मार रही हैं, तो कहीं स्कूल जाने से पहले बच्चियां चुटकी-भर रंगोली से फूल-पत्ती बना रही हैं। कई द्वारों पर शुभागमन के वास्ते स्वस्तिक या ओम् जैसे चिह्न उकेर लिए गए हैं। और मुचि साडि़यों अथवा गाऊन पहने गृहिणियां उड़ती नजरों से, जैसे हर गुजरने वाले को देखती हैं, वैसे ही वहां से विनायक का गुजरना....
