सबिता एकांशी

सबिता एकांशी की पांच कविताएं

सूखते चौराहे

क्या तुमने देखा है
सड़कों पर टहलते 
सूखते गुलाबी होठों वाली उन नन्हीं तितलियों को
जिनकी मुस्कान के साथ-साथ सुख चुके हैं
उनके आंसू
जिनके बदन के साथ सूख चुकी है 
उनकी रूहानी खुश्बू
और क्यों न सूखे
उनको पिलाया भी गया है
सूखते मां के सूख चुके स्तन को
इन नन्हीं तितलियों का 
अब नहीं होता है कोई खास सीजन 
....

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