सूरज पालीवाल

मानवीय विडंबनाओं का संजाल

‘जो दिखता नहीं’ 2018 के बाद दूसरा उपन्यास ‘जिसका अंत नहीं’ 2022 का प्रकाशन जाने-माने कथाकार राजेंद्र दानी की सक्रियता का प्रमाण है। राजेंद्र दानी पिछले चार दशक से अधिक समय से कहानियां लिख रहे हैं पर दोनों उपन्यासों का प्रकाशन पिछले पांच वर्ष में ही हुआ है। उपन्यास व्यापक जीवनानुभवों के साथ धैर्य की मांग करता है, जो निश्चय ही उनकी अपनी पूंजी है। राजेंद्र दानी मूलतः मधà....

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