सुपरिचित रचनाकार अरुण अर्णव खरे मूलतः व्यंग्यकार हैं लेकिन जिस तैयारी के साथ उपन्यास, कहानी, कविता लिखते हैं साबित होता है उनकी कलम गद्य, पद्य दोनों विधा में समान रूप से दक्ष है। व्यंग्यकार की भाषा में स्वाभाविक तौर पर कौतुक का जो पुट होता है उस पुट का असर समीक्ष्य पुस्तक की समस्त ग्यारह कहानियों में इस तरह मौजूद है जैसे कहानियों से हमारा आपसी वार्तालाप हो रहा है। कहान....
