रोटी
रात्रि के अंतिम पहर
खेतों की ओर रूख किए
टटोलती हंसिया दराती
शिराओं में खून नहीं
दुख बहता है
भूख चलाती है उन्हें
पसीजता तामई रंग
खुत्थियां चूमती बेवाइयां
बेजार काया
बेजान हंसी
उदासी घोलता
बैसाख का चढ़ता सूरज
रात बिस्तर पर दुख, दुखता है
चटकती हैं हड्डियां
जीवन के बखार में
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