आप एक आदिवासी कवयित्री हैं। आप हमेशा अपने समाज के बारे में लिखती हैं और सोचती हैं? क्या आपके लेखन से आपके समाज में कोई बदलाव आया है?
देखिए रचनाकार आदिवासी हो या गैर-आदिवासी हो कोई भी रचनाकार लिखने से पहले मनन चिंतन अवश्य करते हैं जहां तक बदलाव की बात है तो रोज यदि कोई बार-बार एक ही क्रिया को करता है तो उसमें कुछ परिवर्तन जरूर देखने को मिलता है। दुनिया गतिमान हैं, ....
