वह आदिवासी है
आसमान में
चमकते हो सूरज की तरह
तुम्हारी गोद में पलती है
धरती की आदिम सभ्यता
कौन मिटाएगा उसे
जो है समस्त सागर, भू और आकाश में
विद्यमान
सृष्टि का पहला हस्ताक्षर
तैरती हैं हजारों स्मृतियां शाखों पर
जो रहते हैं
सम्मान में सदा सिर झुकाए
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