रजनी गुप्त

हू केयर्स

सालों बाद जा रही हूं दिल्ली, जहां से बुरी तरह ऊबकर मैंने इस सुदूर शांत अल्पज्ञात-सी पहाड़ी जगह में नौकरी करने का मन बनाया था। उस रात अचानक आए फोन से मेरी सालों पुरानी सोयी तंद्रा टूटी और तत्काल निकलना पड़ा, जहां सालों पहले टकराई थी उससे और धीरे-धीरे गहराती गई हमारी दोस्ती। 
बेहद जटिल पहेली है ये लड़की विजय जिसकी पर्सनैल्टी इतनी उलझी हुई है आज तक नहीं बूझ पाई मैं। इसे देख....

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