साहित्य को पहले समाज का आईना कहा जाता था। फिर कहा जाने लगा कि वह जीवन को दिशा देने का कार्य करता है। बहुत से लोग साहित्य को संवेदना तथा जीवन मूल्यों के जागरण की भूमिका में देखते हैं। जबकि एक वर्ग का कहना है कि साहित्य कलाकर्म है, उसे कला की दृष्टि से देखा जाना चाहिए। आपकी नजर में साहित्य को कैसे देखा जाना चाहिए?
मनुष्य को, ....
