संजय अलंग

संजय अलग की कविताएं

गेड़ी

हर स्थिति में जी लेता हूं मैं
खोज लेता हूं खेल और आनंद
कठिनाई में भी 

नहीं बनाई जब सड़क 
नहीं दिया जब पथ
बारिश में जब
रच गया इनमें कीचड़

इस कांदो में भी
खोज निकाला मैंने आनंद
निकलने को इससे बाहर
बना ली गेड़ी मैंने 
खेलने लगा खेल भी उससे ही

तुम तो इसे लोकजीवन बता रहे थे Subscribe Now

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