कुलदीप सिंह

कुलदीप सिंह की कविताएं

(1)

थक गया जब पानी
दुनिया में भाग-दौड़ करते-करते
तब एक गह्नर में उतरा
  और धारण कर लिया मौन

झील,
पानी की संन्यासिक प्रवृत्ति का शुभ-आरंभ है।

(2)

भीषण गर्मी पड़ती रही
झील की देह तपती रही
व सूखती रही दिन-ब-दिन
नहीं तोड़ा फिर भी उसने मौन
अनवरत रही ध्यानमग्न
शनैः-शनैः उतरती रही Subscribe Now

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