(1)
थक गया जब पानी
दुनिया में भाग-दौड़ करते-करते
तब एक गह्नर में उतरा
और धारण कर लिया मौन
झील,
पानी की संन्यासिक प्रवृत्ति का शुभ-आरंभ है।
(2)
भीषण गर्मी पड़ती रही
झील की देह तपती रही
व सूखती रही दिन-ब-दिन
नहीं तोड़ा फिर भी उसने मौन
अनवरत रही ध्यानमग्न
शनैः-शनैः उतरती रही
