मूल रूप से कवि, कथाकार, आलोचक और संपादक भरत प्रसाद का पहला उपन्यास ‘काकुलम’ का कथानक उन युवा व जवानी की दहलीज पर दस्तक देते वर्ग के इर्द-गिर्द बुना गया है, जो पल- प्रतिपल स्वयं के लिए स्वतंत्र स्पेस अर्जित करने के सतत संघर्ष से गुजर रहे हैं। उपन्यास का शीर्षक ही रहस्यमयी है। आम पाठक उपन्यास के पन्नों से गुजरने से पहले ‘काकुलम’ का अर्थ जानने के लिए उत्सुक होता है। यह ....
