स्त्रियों का अतीत तथा वर्तमान हमेशा से दारुण तथा कष्टकारी रहा है। स्त्रियों को कभी दासी तो कभी सहचरी के रूप में रखकर बहुत कमतर आंकने का प्रयास हमेशा से होता आ रहा है। इसी संदर्भ को समझने के लिए युवा आलोचक शिव कुमार यादव द्वारा संपादित आलोच्य पुस्तक ‘युद्ध और स्त्री’ में संकलित बाइस आलेखों का अवलोकन करना तथा इस पुस्तक को पढ़ने की प्रक्रिया से रू-ब-रू होना इस बात की शिन....
