पंची को सब छिनाल कहते हैं। मजाक में उसका नाम दुनलिया भी है। जाने किसको अपने रूप से दाग दे-धांय! तीखे नैन- नक्श, गोरा तांबई चेहरा, गठे हुए वक्षस्थल, लम्बी छरहरी काया ---जब से वह शीतल पुर ब्याह कर आयी है, गांव के छुतहर लोगों की नजर उसी पर रहती है, कोई इधर से कनखी मारता है, कोई उधर से निहारता है। बेचारा मंटा क्या जाने पंजाब में कि गांव में वह कौन-सी हिरणी को छोड़ आया है---जिसे सब नोचकर ख....
