अमिता प्रकाश

कतरनें

जैसे ही उसने आंखें खोलीं पश्चिम दिशा में छोटे-छोटे बादलों की कतरनें तैर रही थीं। कहीं मुड़ी-तुड़ी सी, कहीं पूरी लम्बाई में। ‘पूरब की ओर सिर करके ही सोना चाहिए दादी की कही इस बात ने मन के किसी कोने में परमानेंट जगह बना ली थी, तो बढ़ई द्वारा बनाए गए बेड का सिरहाना भले ही पश्चिम दिशा में खिड़की से कुछ इंच की दूरी बनाकर खड़ा था, पर उसकी ओर वह पैर करके ही सोती है। इसलिए  आंखें  खुलत....

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