(चरित्रें के नाम बदल दिए गए हैं पर किस्से में गप्प रत्तीभर नहीं है, बल्कि यह कोई किस्सा ही नहीं है---आपबीती है।)
मई: इसी वर्ष।
जब तक दुनिया में गैर-दुनियादार, सरल और शिष्ट लोग हैं, कोई चतुर-सुजान पैसे-कौड़ी का मुहताज नहीं रह सकता।
बाबू भोला शंकर जितने हताश थे उससे कहीं ज्यादा हतप्रभ था बेटा गोपाल शंकर। निमिष-निमिष बदलते इस तेज रफ्रतार समय म....
