सुशांत सुप्रिय

चश्मा 

‘‘पापा, भगवानजी तो इन्सानों को बड़ी मेहनत से बनाते
होंगे। जब एक इंसान दूसरे इंसान को मार डालता है तो
भगवानजी की सारी मेहनत बेकार हो जाती होगी न।’’
-एक पांच साल का बच्चा अपने पिता से।
क जलती हुई प्यास-सा था वह दिन। और मैं उसमें एक तड़पता हुआ प्यासा। मैंने विज्ञानेवर जी के बारे में जान-पहचान वालों से सुन रखा था कि वे एक लेखक थे जो अपने समय को डीकोड करने की कोशिश ....

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