गांव से तीसरी बार उसके लिए बुलावा आ चुका था लेकिन जगत नहीं गया था। वह बसोला लेकर अपने मकान के पिछवाड़े की ऽाली जगह पर हल को दुरस्त करने में लगा हुआ था। तन पर स्लेटी रंग का कुर्ता और उसी से मेल ऽाता पाजामा। वह बसोले की एकाध चोट हल पर करता और फिर बीड़ी सुलगाकर उसके सुट्टðे मारने लग जाता। कभी वह बीड़ी को अपने होंठों पर ही दबा लेता और उसके हाथ हल को उलटने-पलटने में लग जाते। उसकी ब....
