यूं तो मैंने पापा से पिछले दस सालों में सौ शब्द भी नहीं कहे होंगे, मगर उस दिन मैंने उन्हें बहुत कुछ कह दिया। बहस इस बात पर हुई थी कि वो हमें अपना समय नहीं देते। अपने दोस्तों, यारों में घिरे रहते। उस दिन मैंने ऊबकर उनसे कह दिया कि पापा अब ये सब हमको ठीक नहीं लग रहा है।
‘जब बेटा ही दुनियादारी सिखाने लगे, तो समझो की दुनिया से संन्यास लेने का समय आ गया।’ ये कहकर अगले ही दिन उन....
