मां
पिता बहुत पढ़े लिखे थे
कई डिग्रियां लेने के बाद भी
वे हमेशा कुछ न कुछ पढ़ते ही रहते
कई किताबें भी लिखीं
‘प्रेयस पाथेय’ पर चलते हुए
‘श्रेयस के क्षितिज’ तक की
उनकी जीवन यात्र
बहुत रोचक हुआ करती
लेकिन कभी-कभी
उदास हो खुद ही कहने लगते
यहां कुछ नहीं है
इस जीवन में कुछ नहीं रखा&nb....
