बीते दो-ढाई दशकों में हिंदी कहानी का रंग-रूप कैसे बदला, इस सवाल के जवाब के लिए थोड़ा और इंतजार अपेक्षित है लेकिन उन अनमोल बदलावों को बुलंदी तक पहुंचाने में जिन मौजूदा कहानीकारों ने सबसे ज्यादा जोर लगाया, उनमें कथाकार मनोज रूपड़ा एक अनिवार्य नाम हैं। ‘साज नासाज’, ‘रद्दोबदल’, ‘आमाजगाह’, ‘टॉवर ऑफ साइलेंस’ और ‘दहन’ जैसी कई उम्दा कहानियों से हिंदी कहानी के पा....
