मनोज रूपड़ा की प्रायः हर कहानी में किसी न किसी रूप में जीवन की तलाश है, बदलाव के कारणों की खोज अथवा जीवन के असली भेद मालूम करने का जतन है। कई बार ये सारे तत्व अनायास उभर आते हैं, कई बार सयास। कहानीकार की कहानियों के संदर्भ में एक रुचिकर तथ्य दर्ज करना जरूरी है। वह यह कि भूमंडलीकरण के दबदबे से अधिक उसके बाद की परिस्थितियों की अकुलाहट उनकी कहानियों में परिलक्षित हुई है।
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