विश्वनाथ त्रिपाठी एक अच्छे किस्सागो हैं। ‘नंगातलाई का गांव’, ‘व्योमकेश दरवेश’ (आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी का पुण्य स्मरण), ‘बिसनाथ का बलरामपुर’ (स्मृति आख्यान) और ‘गुरु जी की खेतीबारी’ (संस्मरण) उनकी किस्सागोई के अन्यतम उदाहरण हैं। प्रकाशन के साथ ही उनकी ये किताबें चर्चित रही हैं। आलोचना की दृष्टि से ‘पेड़ का हाथ’ (केदारनाथ अग्रवाल की कविता पर एकाग्र)....
