हरियश राय

अंधेरे से उजाले की ओर 

डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी हमारे समय के ऐसे विद्वान-लेखक आलोचक हैं जिनका जितना अधिकार मध्यकालीन साहित्य और आधुनिक साहित्य पर है, उतना ही अधिकर उर्दू पर भी है। वे फिराक और गालिब को उसी तरह समझाते हैं जिस तरह लोकवादी तुलसीदास को या कबीर और मीरा को। उनकी ज्ञान-परिधि में आधुनिक साहित्य के सभी महत्वपूर्ण कथाकार हैं चाहे गुलशेर खान ‘शानी’ हो, शेखर जोशी हों, अमरकांत हों, भैरव प्रसाद गुप्....

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