विश्वनाथ त्रिपाठी हिंदी आलोचना के स्थायी स्तंभ के रूप में मौजूद हैं। उनकी आलोचना ने हिंदी आलोचना को गरिमा प्रदान की है। सत्तर वर्ष के लंबे लेखकीय जीवन में उन्होंने कई अनमोल कृतियां लिखी हैं, जिसके गवाह हिंदी के अनगिनत पाठक हैं। उनका आलोचनात्मक गद्य में प्रगतिशील विचारों की अजय धारा हैं, इसी तरफ संवेदनात्मक धरातल पर विश्वनाथ त्रिपाठी का कोई जोड़ नहीं है। विश्वनाथ त्र....
