यौन उत्पीड़न जैसे संवेदनशील मामलों में जब कोई महिला किसी व्यक्ति पर आरोप लगाती है तो समाज की भावनाएं तुरंत उबल पड़ती हैं। लोग न्याय की प्रतीक्षा नहीं करते, जांच की आवश्यकता नहीं समझते और न ही यह विचार करते हैं कि क्या कोई औपचारिक शिकायत दर्ज हुई है या नहीं। भीड़ का फैसला तुरंत सुना दिया जाता है कि फंला व्यक्ति दोषी है। सोशल मीडिया पर उसकी निंदा शुरू हो जाती है, मीम्स बनते है....
