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साहित्य अकादमी ने जैसे ही अपने वार्षिक पुरस्कारों की घोषणा की और ममता कालिया को सम्मानित किया गया, तो मेरे भीतर स्वाभाविक रूप से प्रसन्नता का भाव आया। यह प्रसन्नता केवल एक लेखक के सम्मानित होने की नहीं थी, बल्कि उस परंपरा की थी जिसमें शब्द, संवेदना और विचार को अब भी महत्व दिया जाता है। लेकिन इसी प्रसन्नता के समानांतर एक और परिचित दृश्य उभरता है, सोशल मीडिया पर ....
