मृत्युंजय कुमार मनोज

मृत्युंजय कुमार मनोज की कविता

अंधेरा 

सर्द जाड़े की रात थी 
वह घर जा रहा था 
रास्ते में अंधेरा था
धुंध बड़ा गहरा था 
एक मोड़ आया
उसने गलती की
वाहन सहित एक गड्ढे में जा गिरा

गड्ढे में पानी गहरा था 
वह बचाने की आवाज लगाता रहा 
सड़क किनारे आते-जाते लोग सुनते रहे 
उन्हें ठंड लग रही थी 
उन्हें भी डूबने का डर था 
सभी एक-दूसरे को आशा ....

Subscribe Now

पाखी वीडियो


दि संडे पोस्ट

पूछताछ करें